Radha Krishn: Krishna-Arjun Gatha 17Aug full Episode

Radha Krishn: Krishna-Arjun Gatha 17Aug full Episode


Star Bharat Radha krishn episode : 17 August, 
2020. Radha Krishn - Krishn-Arjun    Gatha , Kunti's Shocking Decision S2 - E26 - 17Aug episode in Hindi.

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Hello guys, very Good morning all of you and radhe radhe. स्वागत हैं हमारी website radha krishna serial. जैसा की आपने title देखते पता चल गया है की what a we going to talk about क्या होने वाला है radha krishna serial के Kunti's Shocking Decision S2 - E26 - 17Aug episode मे तो चलीये शुरु करते है.


आज के episode मे दीखाया जायेगा की  कृष्ण अर्जुन को बहुत समझाएंगे और कहेंगे कि जो भी तुम्हारा निर्णय होगा तुम्हारे भविष्य को बदल देगा. तुम्हारा चुनाव का निर्णय सोच समच कर लेना चाहिए. क्योकी तुम सबके प्रिय हो. समस्त प्रजा के, भीष्म पितामह के, पाडंवो के, द्रोणाचार के यहा तक भी द्रोपदी भी सभी पाडंवो से अधीक प्रेम करती है. ओर बात कृष्ण की तो तुम मेरे भी प्रिय हो.


यह बात को सुनते हुए अर्जुन कहते है की आपने सही आप जैसा कहेदे वैसा ही होगा. मे सोच समच कर पुरे ऐकाग्रत से चुनाव मे अपना मत रखुगा. किन्तु अभी आप विश्राम किजिए मे आपके लिए खाना लेकर आता हु.


दुसरी ओर दुर्योधन शकुनि से कहता है की आपने मुझे क्यो रोका? कुछ समय ओर मिल जाता तो वह मुकुट मे सिर पर होता ओर मे भावी राजा बन जाता! आपने मुझे क्यो रोका?आप कृष्ण की बात क्यो मान गये.?

तब शकुनि कहता है की तुमने देखा नही? वह कृष्ण अंतिम समय मे सबको अपने साथ लेकर आया था. यदी तुम सबके विरुद्ध होकर भावी राजा बन जाते तो महाराज गलत साबित हो जाते. ओर गलत राजा का भावी राजा भी गलत होता है.


जिससे भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य, पाडवो ओर कर्ण जिससे समस्त संसार उनके भय से कापते है. ऐसे योधा तुम्हारे विरुद्ध हो जायेगे. हमे ऐसे योद्घा से लडना नही है.

दुर्योधन कहता है की ऐसे मे तो मे राजा बनी नही पाऊगा. वह कृष्ण मे सभी को अपने साथ कर लीया? शकुनी कहता है की कृष्ण ने कहा है की चुनाव जैसा भी हो किन्तु अंतिम निर्णय तो महाराज को ही लेना है.


शकुनि कहता है की हमे दो कार्य करना है की कोन किसमे चुनाव का मत रखता है जिससे हम आगे की युक्ति सोच सके ओर दुसरा की महाराज का निर्णय तुम्हारे विरुद्ध नही होना चाहिए. दुर्योधन कहता है की वाह! मामा आपकी सोच बहोत दुर की है.

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दुसरी ओर दीखाया जाता है की गाधारी सभी पाडंवो ओर द्रोपदी केलिऐ आभूषणो लायी होती है. वह सभी पाडंवो को आभूषण देती है. फिर गाधारी कुन्ती को बुलाकर कहती है यह सारे आभूषण मे तुन्हे देती हु. तुम मुझे महाराज नही बल्की माता कह कर बुलाओगी.


फिर गाधारी अपने गले मे पहेना हुआ उनका प्रिय हार जो उनके विवाह मे उनको मिला था. वह हार द्रोपदी को देकर कहती है की तुन्हे प्रेम से ज्यादा तुम्हारे उपर दाईत्व भी है. अब से तुम इस राज्य की एक सदस्य हो.

तुम्हे पाडंवो का ओर प्रजा का भी द्यान रखना होगा. द्रोपदी कहती है की मे अवश्य आपके हर एक दाईत्व का पालन करुगी. फिर गाधारी सबको खाना खाने बुलाती है. तब द्रोपदी पाडंवो से पुछती है की अर्जुन कहा है? उनको भी खाना खाने बुलाईये.

तब नकुल ओर भीष्म कहते है की उनकी चिन्ता मत करो. अर्जुन सबके प्रिय है उनको द्रोणाचार्य, भीष्म पितामह ओर विदुर जी प्केम से खिला रहे होगे.

दुसरी ओर दीखाया जाता अर्जुन खाना खा कर कहते की मुझसे ओर नही खाया जायेगा. तब भीष्म पितामह ओर द्रोणाचार्य कहते है की अभी तो शुरु ही हुआ है. अभी तो ओर खाना है. पितामह कहते है की तुम ऐसे नही मानोगे मे तुम्हे अपनो हाथो से खाना देता हु.


अर्जुन भीष्म पितामह के हाथो से खाना खाने को मना करता है. तब कृष्ण कहते है की खा लो पार्थ. आज जो हाथ तुम्हे खाना खिला रहे है. कल पता नही वही हाथ तुम्हारे विरुद्ध हो जाये!. इसलिए यह स्मितिया तुम्हे हमेशा अपने जिवन मे याद आयेगी.

तब अर्जुन खाना खाते है. फिर अर्जुन कृष्ण से पुछते है की आपने ऐसा क्यो कहा की पितामह ओर मेरे प्रेम के बिच मे कोई आयेगा. समय चाहे जैसा भी हो. किन्तु मे पितामह के साथ हु. यह कह कर अर्जुन के आखो मे आसु आ जाते है.

तब पितामह कहते है की तुम ऐक विर हो ओर वीर की आखो से आसु नही निकलते. तब कृष्ण कहते है की इसे रोने दीजिए. कोन कहता है की वीर रोते नही. 

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यह कर कृष्ण की आखो से भी आसु निकलते है. तब पितामह कहते है की आपकी आखो से आसु क्यो निकल रहे है.

तब कृष्ण कहते है की आप दोनो का यह स्नेह देखकर मुझे ऐक विशेष व्यक्ति का स्मरण हुआ. जो मेरे लिए कभी चुपकर तो कभी सामने से, कभी माखन तो कभी खीर खीलाती ती थी. तब कृष्ण स्मरण करते है. जब राधा उन्हे खाना खिलाती थी.

कृष्ण राधा को बहोत स्मरण करते है. तब राधा को आभास हो जाता है की कृष्ण उसे बहोत स्मरण कर रहे है. तब राधा कहते है की कृष्ण तुम चिंतित मत रहो. अपने अन्दर के प्रेम को दबाकर मत रखो. उसे बाहर आने दो.

तुम्हे घर्म की स्थापना करनी है. तुम मेरे पास आकर, मेरा हाथ पकड लो. तब कृष्ण राधा का हाथ पकड लेते है. ओर कहते है की मे आ गया अपने पास. ओर दोनो रोने लगते है.


दूसरी ओर कुंती बुलाती है पांच पांडवों को और कहती है की पाचो पाडंवो का चुनीव का मत ऐक ही होना चाहिए. तुम सबको अलग अलग मत देना नही है. तब अर्जुन कहता है की यह कैसे सभंव है. माधव ने कहा है की मेरा मत सबसे महत्वपूर्ण है.

हम सभी ऐक ही मत कैये देगे. तब कुन्ती कहती है अगर तुमने अलग अलग मत दीया तो शत्रु को लगेगा की तुम सब ऐक नही हो. इसलिए मे इसकी अनुमति नही दे सकती.

तब कृष्ण कहते है की मुझे लगता है की सबको अपना मत देना चाहिए.आप दो कह रही उससे तो सभी पाडवो को यातो गदाधारी होना चाहिए यातो सभी को धनुषधारी किन्तु ऐसा नही. सभी की अपनी विशेषता है.

अगर अभी पाडंवो अपना अलग मत रखे ओर अतिम निर्णय ऐक साथ मिलकर लेय तो इससे पाडंवो की ऐकता बढेगी ओर सबके सामने पाडंवो को ऐक समान बुद्धीमानी लगेगे. फिर सभी पाडंवो ओर कुन्ती मान जाते है.

कृष्ण अर्जुन से कहते है की तुम्हे सोच समच कर योग्य निर्णय लेना है. यह कह कर कृष्ण वहा से चसे जाते है. तब अर्जुन कहते है की निर्णय जो भी लेना है. माधव मेरे साथ है तो मुझे चिता करने की जरुरत नही. ओर आज का episode यही पे खत्म होता है.

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कल के एपिसोड की स्टोरी में दीखाया जाता है कृष्ण एक ऐसी विशेष स्थान पर बैठे हुए थे जहां पर अर्जुन पहुंच जाते अर्जुन कहते हैं कि आज मैं अपने इष्ट को प्रणाम करता हूं जब तक आप मुझे योग्य निर्णय नहीं देंगे तब तक मैं नहीं हूं उठुगा. कृष्ण कहते है की निर्णय तुम्हारा है ओर तुम्हे ही करना है.


दुसरी ओर बलराम कृष्ण से पुछते है की तुम्हे तो कृष्ण भक्त सारथी नही चाहिए किन्चु अर्जुन तो ओर ज्यादा भक्त बन रहा है. तब कृष्ण कहते है की अर्जुन स्वयम योग्य निर्णय लेय तो ठीक है. किन्तु अगर उसने धर्म की स्थापना के लिए ध्यान नहीं दिया तो उसे बहुत बड़ी यातना सहनी पड़ेगी और आज का एपिसोड ओर कल का एपिसोड खत्म है.

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